नज़्म ~दोस्ती
जब पता चला कि
तुम्हारी मोहब्बत हमे तोड़ने के लिए थी
तो आंखों के कोने से
अश्क़ की दो बूंदे लुढ़क आयी
और उन्हें सिर्फ हम बाहों से पोछ सके ...बस।
पर हां...
तुम कामयाब हो गए
पर अफसोस तुम हमे नही तोड़ सके
तोड़ सके तो बस
इस मासूस नासमझ दिल को।
अब यारो इस शख्स को...
इस इश्क़ की नज़रों की इनायत नही
दोस्तो की मेहरबानी चाहिए।
~~~अशोक सिंह 'अश्क़'
