सोमवार, 30 अक्टूबर 2017

ईश्वर और शांति

     ईश्वर और शांति 




     मैं और तुम
     अमूमन हम सब
     ईर्ष्या और इच्छाओं में लिप्त
     देखो
     उन कुछ शांत और स्थिर संतो को
     चेहरे में संतोष और सुकून की लकीरें
     दृढ़ है जो अपने विश्वास पर
     अडिग है अपनी आस्थाओ पर
     चले आ रहे हज़ारो
     दुःखी और व्याकुल मन
     जिनके पास
     ईश्वर और शांति को खोज में।
     ~~~अशोक सिंह'अश्क़'

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