गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

gazal~0.45





मुलाकात 


बिन तारे बिन जुगुनू रात,...रात नही होती।
गुजरती है वो मेरी गली से, बस मुलाकात नही होती।

मुनव्वर है चांद आसमा में, खुश है चांदनी
बुला लेता उसे गुफ्तगू के लिए  ,बस उससे मसाफ़ात नही होती।

शर्माना ,गर्दन झुकाके चलना इसे मोहज्ज्ब समझती है वो
उसे नही पता क्या...बिना नज़र मिलाये इख़्तलात नही होती।

कुछ दिनो से इन दरख्तों में ,परिंदों को नही देखा
पूछा तो पता चला ,इनके पत्तो में आपस मे बात नही होती।

इंतज़ार में उसके ...चराग़ जलते रहे रात भर
ख्वाबो में वो साथ रहती है, हकीकत में साथ नही होती।

अवसाद हो या उन्माद ...देखता हूं उसे तो मुस्कुरा देता हूं

एक वो है जो कहती है इश्क़ में तुम जीत गए,मेरी मात नही होती।

चांद भी कायल है मेरी मोहब्बत पर ,चला आता है मोहब्बत की परिभाषा पूछने
उसे क्या पता मेरी अपने चांद से मुलाकात नही होती।


 

                                                                                          ~~~अशोक सिंहअश्क़' '




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

हमेशा देर कर देता हूँ

हमेशा देर कर देता हूँ मैं ज़रूरी बात कहनी हो कोई वादा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं   मदद करनी हो...